अधिक मास 2026 तिथि: क्या है खरमास और अधिकमास में अंतर? जानिए 2026 में कब से कब तक रहेगा अधिक मास
हिंदू पंचांग में समय की गणना केवल तिथियों या मौसम का क्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और ग्रहों की गति के आधार पर है. ऐसे में खरमास और अधिकमास दो ऐसी खास अवधि हैं, जिनका प्रभाव सीधे शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों पर पड़ता है. हालांकि, अक्सर लोग दोनों को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि दोनों की प्रकृति और कारण बिल्कुल अलग हैं. आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं कि खरमास और अधिकमास क्या हैं, इन दोनों में क्या अंतर है और साल 2026 में अधिकमास कब शुरू होगा?
खरमास क्या है?
पंचांग के अनुसार, खरमास वह समय है जब सूर्य ग्रह बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं. यह अवधि हर साल आती है, इसलिए इसे नियमित मासिक चक्र का हिस्सा माना जाता है. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से धनु खरमास और सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से मीन खरमास शुरू होता है. पंचांग अनुसार, साल 2025 का धनु खरमास 16 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 को समाप्त होगा.
खरमास को अशुभ क्यों माना जाता है?
पौराणिक मान्यता है कि इस समय सूर्य देव के रथ में घोड़ों के स्थान पर खर यानी गधे जुड़ जाते हैं. इससे उनकी गति धीमी होती है. हिन्दू धर्म में यह समय स्थिर ऊर्जा और रुकावट का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण विवाह, गृहप्रवेश, व्यवसाय आरंभ, सगाई, मुंडन जैसे सभी शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं. हालांकि, यह समय दान-पुण्य, जप और तप करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है.
अधिकमास क्या है?
हिन्दू समय गणना के अनुसार, अधिकमास लगभग हर तीन वर्ष में आता है. चंद्र और सूर्य के कैलेंडर की गति में अंतर को संतुलित करने के लिए यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इस प्रकार, वह साल जब अधिकमास होता है, तो यह एक ‘लीप ईयर’ (Leap Year) होता है. इसे मलमास, मलिन मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.
खरमास की ही भांति इस महीने में भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृहप्रवेश, उपनयन आदि वर्जित होते हैं. लेकिन, पूजा-पाठ, व्रत, कथा और दान का अत्यधिक महत्व माना गया है. हिन्दू धर्म में यह महीना आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोत्तम समय माना जाता है.
खरमास और अधिकमास में अंतर
खरमास और अधिकमास, दोनों ही हिंदू पंचांग से जुड़े विशेष समय होते हैं, लेकिन इनका कारण और प्रकृति बिल्कुल अलग है. इसे सरल भाषा में ऐसे समझ सकते हैं:
- खरमास तब आता है जब सूर्यदेव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं. वहीं, अधिकमास इसलिए आता है क्योंकि चंद्र और सूर्य के कैलेंडर की गति में अंतर होता है. इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है.
- खरमास हर साल 2 बार आता है, एक बार दिसंबर-जनवरी के आसपास और दूसरी बार मार्च-अप्रैल में, वहीं दूसरे ओर अधिकमास करीब 3 साल में सिर्फ एक बार आता है.
- खरमास की कुल अवधि लगभग 60 दिनों की यानी दो महीने की होती है, जबकि अधिकमास केवल 30 दिनों का होता है.
- ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, खरमास सूर्य और गुरु ग्रह बृहस्पति के संबंध और सूर्य के उनके राशियों में गोचर से जुड़ा है. वहीं, अधिकमास पूरी तरह चंद्रमा की गति पर आधारित होता है.
साधारण शब्दों में कहें तो खरमास सूर्य की चाल से बनता है और अधिकमास चंद्रमा की चाल से जुड़ा है. खरमास हर साल आता है, लेकिन अधिकमास 3 साल में एक ही बार होता है.
कब से कब तक है अधिकमास 2026?
पंचांग के अनुसार, अधिकमास 2026 की शुरुआत 17 मई, 2026 से होगी और इसका समापन 15 जून, 2026 को होगा. इसी अवधि में ज्येष्ठ माह 22 मई से 29 जून 2026 तक रहेगा. इस तरह साल 2026 में कुल 13 महीने होंगे.
आपको बता दें कि अधिकमास को पुण्य संचित करने का महीना कहा गया है. इस दौरान लोग पूजा-पाठ, कथा-सत्संग, मंदिर दर्शन, दान और व्रत करते हैं. कहते हैं, अधिकमास होने के कारण इस महीने किया गया पुण्य सामान्य से अधिक फल देता है.
