Explained : पश्चिमी देशों को क्यों चुभ रहा पुतिन का भारत दौरा? – Nepal Updates | Stock Exchange

क्या पुतिन का भारत दौरा पश्चिम देशों को चुभ रहा है? जानिए 5 बड़ी वजहें!

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर पश्चिमी देशों में हलचल है। भारत-रूस संबंध हमेशा से ही मजबूत रहे हैं, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत में फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों ने एक लेख लिखकर रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। क्या पुतिन का यह दौरा पश्चिम देशों को चुभ रहा है? आइए जानते हैं 5 बड़ी वजहें:

रूस की वैश्विक अहमियत

पश्चिमी देश रूस को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत जैसे बड़े देश का पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करना यूरोप की रणनीति को कमजोर करता है। भारत का रूस के साथ बड़ा समझौता यह संदेश देता है कि पुतिन अब भी विश्व के अहम नेताओं में से एक हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

रूस को आर्थिक मदद

यूरोप और अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन भारत सस्ती कीमत पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। इससे रूस को अच्छा-खासा रेवेन्यू मिल रहा है, जिसे वह यूक्रेन युद्ध में खर्च कर सकता है। कच्चा तेल आयात भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालता है।

हथियारों का कारोबार

अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि कोई भी देश रूस से हथियार न खरीदे, लेकिन भारत हमेशा से रूस का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। यह पश्चिमी देशों की उस रणनीति को झटका देता है, जिसमें वे सैन्य रूप से भी रूस को अलग-थलग करना चाहते हैं। रक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच एक मजबूत कड़ी है।

भारत को अपने पाले में लाने में नाकाम

पश्चिमी देश चाहते थे कि भारत यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की खुलकर निंदा करे और यूरोप के खेमे में आ जाए। लेकिन भारत ने अपनी विदेश नीति का पालन करते हुए निष्पक्ष रुख रखा। भारत के इस रुख को पुतिन के दौरे से और मजबूती मिलेगी। भारतीय विदेश नीति की यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

डॉलर को मिल सकती है चुनौती!

भारत और रूस अपना कारोबार रुपये और रूबल में करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में पश्चिमी देशों की करेंसी डॉलर को चुनौती मिल सकती है। यह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव हो सकता है। यह आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोल सकता है।

एशिया में कम होता दबदबा

अमेरिका और यूरोपीय देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं। चीन को बैलेंस करने के लिए ये देश भारत को अहम भागीदार मानते हैं। इन देशों का दबाव दरकिनार करते हुए रूस के साथ भारत करीबी संबंध बनाए हुए है। इससे इन देशों का एशिया में दबदबा कम होता दिख रहा है। भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। एशियाई शक्ति के संतुलन में बदलाव हो रहा है।

दुनिया को लामबंद करने में नाकाम

पश्चिमी देश रूस के खिलाफ पूरी दुनिया को लामबंद करना चाहते हैं, लेकिन पुतिन का भारत दौरा रूस-चीन-भारत के बीच मजबूत होते संबंध का मैसेज देता है। ऐसे में यूरोप के लिए पुतिन के इस दौरे को कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

पश्चिम देशों के इतने दबाव के बावजूद भी भारत रूस के साथ अपने संबंधों को क्यों बनाए हुए है?

  • भारत के ज्यादातर सैन्य उपकरण और हथियार रूस से लिए हुए हैं।
  • भारत के साथ रूस अपनी नई डिफेंस टेक्निक भी शेयर करता है।
  • यूक्रेन युद्ध के बाद, भारत को रूस काफी कम दाम पर कच्चा तेल बेच रहा है।
  • रूस ने कश्मीर समेत कई मुद्दों पर भारत का समर्थन किया है।
  • रूस, भारत और चीन में बैलेंस बनाने अहम भूमिका निभाता है।

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