गोवर्धन पूजा: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। यह आमतौर पर दिवाली के अगले दिन आता है। इस वर्ष, अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण, गोवर्धन पूजा 2024, 22 अक्टूबर को मनाई जा रही है। इस दिन, भक्त गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करते हैं।
अन्नकूट का भोग भगवान को अर्पित किया जाता है। गोवर्धन पूजा का महत्व प्रकृति और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना है। यह हमें प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सम्मान सिखाती है। यह भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कृषि और पशुपालन के महत्व को दर्शाता है। गोवर्धन पूजा विधि सरल है, लेकिन इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। गोवर्धन पूजा मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए और उसी अनुसार पूजा करनी चाहिए। गोवर्धन पूजा के मंत्र और आरती का पाठ करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन गोवर्धन परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पूजा के दिन, लोग अपने घरों को सजाते हैं और मिठाई बनाते हैं। यह त्योहार खुशी और उल्लास का प्रतीक है। गोवर्धन पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देता है। लोग मिलकर पूजा करते हैं और एक दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं। गोवर्धन पूजा का आयोजन मंदिरों और घरों में किया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन गरीबों को दान देना भी शुभ माना जाता है। गोवर्धन पूजा के उपाय करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
