सिंघु बॉर्डर हत्याकांड की जांच शुरू:निहंग बाबा अमन सिंह समेत कई लोगों से बात करेगी कमेटी, सिरसा बोले

लुधियाना2 घंटे पहले

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सिंघु बॉर्डर हत्याकांड की जांच के लिए गठित कमेटी के सदस्य मीटिंग के दौरान। - Dainik Bhaskar

सिंघु बॉर्डर हत्याकांड की जांच के लिए गठित कमेटी के सदस्य मीटिंग के दौरान।

सिंघु बॉर्डर पर हुई युवक की निर्मम हत्या मामले की जांच के लिए बनाई गई तथ्य खोज कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। कमेटी सदस्यों की तरफ से गुरुवार को एक मीटिंग की गई है और उसके बाद जांच का काम शुरू कर दिया गया। कमेटी सदस्यों की तरफ से इस संबंध में विचार विमर्श भी किया गया है कि यह काम कैसे किया जाना है। कमेटी की तरफ से अपनी रिपोर्ट तीन या चार दिन में पूरी की जानी है और इसे किसान संगठनों के समक्ष पेश किया जाना है।

कमेटी के अहम सदस्य बलदेव सिंह सिरसा के अनुसार, हम जांच को जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं। हम इस मामले में उन सभी लोगों से बात करेंगे जो हत्या करने, लखबीर को यहां लाने के लिए जिम्मेदार हैं। हमने इसके लिए अपना प्रोग्राम तैयार कर लिया है। बाबा अमन सिंह, दूसरे निहंग सिंहों और धरने में शामिल लोगों से भी बात करेंगे। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करके किसान संगठनों को सौंप दी जाएगी।

27 अक्टूबर से पहले जांच पूरी करने का टास्क

कमेटी की तरफ से जांच 27 अक्टूबर से पहले पूरी करके रिपोर्ट दी जानी है। क्योंकि 27 अक्टूबर को निहंग सिंहों की तरफ से धार्मिक एकत्रता बुलाई गई है और इस दिन वहां पर संत समाज, किसान संगठनों और अन्य लोगों को बुलाया गया है। इसमें फैसला लिया जाना है कि निहंग सिंहों को यहां रुकना है या उन्हें यहां से चले जाना चाहिए। बाबा अमन सिंह की कुछ फोटो सामने आईं थीं, जिन पर एकत्रता में बात होनी लाजिमी है, इसलिए कमेटी अपनी जांच को इससे पहले मुकम्मल करना चाहती है, ताकि एकत्रता में तथ्यों के साथ बात रखी जा सके।

15 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर हुई थी लखबीर की हत्या

दशहरे के दिन 15 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर तरनतारन के नजदीकी गांव चीमा कलां निवासी लखबीर सिंह की निहंग सिंहों द्वारा हत्या कर दी गई थी। उस पर आरोप था कि उसने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की है। इसके बाद ग्रुप के मुखी निहंग अमन सिंह की फोटो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा नेताओं के साथ फोटो वायरल हुई थीं। इसके बाद किसान मोर्चा ने गहरी साजिश की आशंका जाहिर की थी। इसकी जांच के लिए तथ्य खोज कमेटी का गठन किया गया, जिसमें कंवलप्रीत सिंह पन्नू, बलदेव सिंह सिरसा, काका सिंह कोटड़ा, प्रगट सिंह जामाराए और जतिंदर सिंह छीना को शामिल किया गया है।

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