हर गवाह को मारता चला गया पपला:गुरु के मर्डर में मुखबिरी करने वाले को मारने के लिए बना अपराधी, डेढ़ साल में 4 मर्डर

रेवाड़ीएक घंटा पहले

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अपने गुरु, शक्ति गुर्जर उर्फ दूधिया के कत्ल का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर की कहानी बेहद खौफनाक है। महेंद्रगढ़ जिले में खैरोली गांव के पपला ने सबसे पहले अपने गुरु की हत्या में विरोधी चीकू गैंग के लिए मुखबिरी करने वाले संदीप उर्फ फौजी के मामा महेश को मारा और फिर एक के बाद एक, 4 हत्याएं करता चला गया। उसने हर उस शख्स का मर्डर कर दिया, जो उसके खिलाफ गवाह बना। पपला की दहशत के मारे बिमला के परिवार ने उसकी हत्या होने के बाद गांव ही छोड़ दिया। आज भी बिमला के परिवार के ठिकाने की जानकारी चुनिंदा लोगों को है। उन्हें सिर्फ गवाही के समय कोर्ट में देखा गया और वो भी भारी सुरक्षा के बीच।

गुरु की हत्या हुई तो पहलवान से बन गया गैंगस्टर

सात साल पहले तक महेन्द्रगढ़ जिले के खैरोली गांव में रहने वाले विक्रम उर्फ पपला की पहचान सिर्फ एक पहलवान के रूप में थी। 4 फरवरी 2014 को उसके गुरु शक्ति पहलवान उर्फ दूधिया की खैरोली गांव में ही हत्या हो गई। हत्या का आरोप कुख्यात बदमाश सुरेन्द्र उर्फ चीकू पर लगा। पपला को पता चला कि उसके गांव खैरोली में ही रहने वाले संदीप उर्फ फौजी ने शक्ति पहलवान की मुखबिरी की है। पुलिस ने शक्ति गुर्जर की हत्या में सुरेन्द्र उर्फ चीकू के साथ संदीप को भी साजिश का हिस्सेदार मानते हुए गिरफ्तार कर लिया।

अपने गुरु की हत्या का बदला लेने के लिए पपला गुर्जर ने एक महीने बाद ही, मार्च 2014 में संदीप की मां बिमला पर घर में घुसकर हमला कर दिया। उसने बिमला के दोनों हाथ-पैर तोड़ डाले। उस समय घर में बिमला को अस्पताल पहुंचाने वाला कोई नहीं था। महेंद्रगढ़ के ही बिहारीपुर गांव में रहने वाला बिमला का भाई महेश और पिता श्रीराम उसे लेने खैरोली गांव पहुंचे। श्रीराम अपनी बेटी बिमला को एंबुलेंस में लेकर नारनौल के लिए चल पड़े जबकि महेश बाइक पर रवाना हुआ। पपला गुर्जर ने अपने साथियों के साथ मिलकर महेश को रास्ते में गुलावला गांव के पास रोक लिया और लाठी-डंडों से बुरी तरह पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद पपला गुर्जर के खिलाफ केस तो दर्ज हो गया मगर वह पुलिस के हाथ नहीं आया।

नारनौल कोर्ट के बाहर किया संदीप का कत्ल

उधर, शक्ति पहलवान की हत्या के मामले में गिरफ्तार संदीप को जमानत मिल गई। जनवरी 2015 में संदीप पेशी पर नारनौल कोर्ट में पहुंचा। वहां कोर्ट से निकलते ही पपला गुर्जर ने अपने गैंग के साथ मिलकर संदीप की हत्या कर दी। इस हत्या के बाद नारनौल सिटी थाने में पपला और उसके साथियों पर मर्डर का दूसरा केस दर्ज हो गया। संदीप मर्डर केस में उसके नाना श्रीराम मुख्य गवाह बने। पुलिस पहले से दर्ज मर्डर के दो मामलों में पपला को तलाश ही रही थी कि उसने 21 अगस्त 2015 को संदीप की मां बिमला को घर में घुसकर गोलियां मार दीं। पपला गुर्जर की हैवानियत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसने बिमला को 23 गोलियां मारी। बिमला के मर्डर केस में उसका देवर दुड़ाराम (मृतक संदीप का चाचा) मुख्य गवाह है।

पुलिस सुरक्षा के बावजूद श्रीराम को घर में घुसकर मारी गोली

एक के बाद एक लगातार हो रही हत्याओं के बाद महेन्द्रगढ़ पुलिस ने संदीप के नाना श्रीराम को पुलिस सिक्योरिटी मुहैया करवा दी। इसके बावजूद 16 नवंबर 2015 को पपला गुर्जर ने अपने गैंग के साथ मिलकर बिहारीपुर गांव पर धावा बोला और श्रीराम को उनके घर में घुसकर गोली मार दी। इस वारदात के समय श्रीराम के घर में हथियारों से लैस दो पुलिसवाले मौजूद थे मगर वह कुछ नहीं कर पाए। पुलिस सुरक्षा में होने के बावजूद श्रीराम की हत्या हो जाने से पुलिस महकमे की चारों तरफ किरकिरी होने लगी।

जब पुलिस पर दबाव बना तो महेन्द्रगढ़ CIA की टीम ने 12 फरवरी 2016 को पपला गुर्जर को अरेस्ट कर लिया। हालांकि लगभग डेढ़ साल बाद ही, 5 सितंबर 2017 को पपला गुर्जर के साथी महेन्द्रगढ़ कोर्ट में सरेआम फायरिंग करते हुए उसे पुलिस सुरक्षा से छुड़ाकर फरार हो गए। उसके बाद 4 साल तक पपला इधर-उधर भागता रहा। अंत में इसी साल 28 जनवरी 2021 को राजस्थान पुलिस ने पपला गुर्जर को दबोच लिया।

खौफ के चलते गांव छोड़ चुका परिवार

विक्रम उर्फ पपला गुर्जर की दहशत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 21 अगस्त 2015 को बिमला की हत्या के तुरंत बाद उसके परिवार ने खैरोली गांव छोड़ दिया। बिहारीपुर गांव में रहने वाले बिमला के मायकेवाले भी अपना गांव छोड़ चुके हैं। दोनों ही गांवों में इन परिवारों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। पुलिस ने संदीप के चाचा दूड़ाराम व उनके परिवार को सुरक्षा भी मुहैया करवा रखी है। परिवार को आशंका है कि पपला गुर्जर या उसका गैंग उनकी भी हत्या कर सकता है। ऐसे में वकील के अलावा उनका अब गांव या आसपास के इलाके में किसी से कोई संपर्क नहीं है।

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