खुर्शीद की किताब पर रोक नहीं:दिल्ली हाई कोर्ट ने बैन की याचिका खारिज की, कहा

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर किताब से भावनाएं आहत होती हैं तो लोग इससे बेहतर किताब पढ़ सकते हैं। याचिका में कोर्ट से किताब के प्रकाशन, बिक्री, खरीद और वितरण पर बैन लगाने की मांग की गई थी।

खुर्शीद की किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ को लेकर बहुत दिनों से विवाद चल रहा है। इस किताब में खुर्शीद ने हिंदुत्व की तुलना ISIS से की थी।

कोर्ट ने कहा- आप लोगों से किताब न खरीदने को कहें

खुर्शीद ने अपनी किताब के एक चैप्टर 'The Saffron Sky' के पेज नंबर 113 पर हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से की है।

खुर्शीद ने अपनी किताब के एक चैप्टर ‘The Saffron Sky’ के पेज नंबर 113 पर हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से की है।

​​​​​​पेटिशनर ने कोर्ट से कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। यह किताब ऑर्टिकल 19 और 21 के तहत दिए गए मूल आधिकारों का उल्लंघन करती है। कोर्ट ने पेटिशनर से कहा कि, आप लोगों से इस किताब को खरीदने से क्यों नहीं मना करते? आप उन्हें बताइए कि यह किताब सही नहीं है, इसे न पढ़ें।

दंगे होने की बात महज एक आशंका

पेटिशनर ने कोर्ट से कहा कि किताब की वजह से देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या किताब में लिखी गई बात की वजह से देश में कोई सांप्रदायिक घटना हुई है। दंगे होने की बात करना महज एक आशंका है।

कोर्ट ने कहा कि मामला किताब के एक अंश का है न कि पूरी किताब का। अगर आप पब्लिशर का लाइसेंस कैंसिल करवाना चाहते हैं, तो यह अलग मामला है। हमारे सामने पूरी किताब के बजाय उसका केवल एक अंश पेश किया गया है।

किताब पर दी थी सफाई

सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन ऑवर टाइम्स’ पर मचे विवाद पर सफाई दी थी। उत्तर प्रदेश के संभल में उन्होंने कहा था कि मैंने हिंदुत्व की तुलना ISIS से नहीं की है।

उन्होंने कहा कि मैंने दोनों को ‘Similar’ बताया है, न कि ‘Same’ कहा है। मैंने यह नहीं लिखा कि हिंदू धर्म बिल्कुल ISIS और बोको हरम की तरह है। न ही मैंने यह लिखा कि हिंदुत्व को मानने वाले भी अरबी बोलते हैं। सलमान खुर्शीद ने कहा था कि मुझे अफसोस है कि मैंने इस किताब को अंग्रेजी में लिखा है। लोग (भाजपा वाले) अंग्रेजी में थोड़ा कमजोर लगते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि अगर समझ में नहीं आ रहा, तो अनुवाद करा लें।

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