काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण LIVE:मोदी गंगा के बीच खड़े होकर सूर्य उपासना कर रहे, यहां से जल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे

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वाराणसी2 मिनट पहले

वाराणसी में ललिता घाट पर गंगा में उतरकर सूर्य उपासना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी।

आज वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नए परिसर का लोकार्पण होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके लिए अपने संसदीय क्षेत्र काशी पहुंचे हैं। मोदी करीब पौने ग्यारह बजे यहां पहुंचे। काशी के ललिता घाट पर मोदी ने गंगा में उतरकर सूर्य उपासना की। यहां से हाथों में गंगाजल का कलश लेकर वे विश्वनाथ मंदिर पहुंचे हैं। कुछ देर में प्रधानमंत्री बाबा विश्वनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे और गंगाजल से बाबा का अभिषेक करेंगे।

इससे पहले सवा ग्यारह बजे उन्होंने काल भैरव मंदिर में पूजा की। पूजा के बाद वे पैदल ही खिड़किया घाट तक गए। यहां से मोदी क्रूज में बैठकर वे ललिता घाट पहुंचे थे।

काशी में मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट विश्वनाथ धाम को 800 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से बनाया गया है। इसमें श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्राचीन मंदिर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए 5 लाख 27 हजार वर्ग फीट से ज्यादा क्षेत्र को विकसित किया गया है।

वाराणसी के गेस्ट हाउस से कालभैरव मंदिर की तरफ बढ़ता हुआ PM मोदी का काफिला।

वाराणसी के गेस्ट हाउस से कालभैरव मंदिर की तरफ बढ़ता हुआ PM मोदी का काफिला।

2500 साधु-संतों और विशिष्टजन को संबोधित करेंगे मोदी

PM मोदी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में करीब दोपहर एक बजे पूजा करेंगे और करीब दोपहर 1:20 बजे काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद देशभर से आए हुए 2500 संतो-महंतों, धर्माचार्यों, आध्यात्मिक गुरुओं और विशिष्ट लोगों को संबोधित करेंगे। करीब शाम 6 बजे PM मोदी गंगा आरती में शामिल होंगे।

वाराणसी एयरपोर्ट पर PM मोदी को रिसीव करते हुए UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

वाराणसी एयरपोर्ट पर PM मोदी को रिसीव करते हुए UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

ढाई घंटे का समय रिजर्व, देखेंगे गंगा आरती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में दो दिन रहेंगे। आज काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद वे बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) के गेस्ट हाउस में दो घंटे आराम करेंगे। शाम को फिर संत रविदास घाट से नाव की सैर करते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचेंगे। यहां गंगा आरती देखेंगे। इस दौरान काशी पहुंचे मुख्यमंत्रियों के परिजन से मिलेंगे। इसके बाद वापस संत रविदास घाट आएंगे और रात 9:15 बजे BLW गेस्ट हाउस में विश्राम करने चले जाएंगे।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के दोनों स्वर्ण शिखरों पर 1835 में महाराज रणजीत सिंह ने सोना चढ़वाया था। धाम के लोकार्पण से पहले दोनों स्वर्ण शिखरों की सफाई कराई गई है।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के दोनों स्वर्ण शिखरों पर 1835 में महाराज रणजीत सिंह ने सोना चढ़वाया था। धाम के लोकार्पण से पहले दोनों स्वर्ण शिखरों की सफाई कराई गई है।

ऐसे बदला काशी, अब श्रद्धा के साथ सुविधा का भी ध्यान

पहले तंग गलियों में स्थित जिस विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पैर रखने तक की जगह नहीं होती थी, वहां अब सुकून के साथ श्रद्धालु समय गुजार सकेंगे। धाम का मंदिर चौक क्षेत्र अब इतना विशाल है कि यहां 2 लाख श्रद्धालु खड़े होकर दर्शन-पूजन कर सकेंगे। इसके चलते अब सावन के सोमवारों, महाशिवरात्रि के दौरान शिव भक्तों को दिक्कत नहीं होगी। विश्वनाथ मंदिर के क्षेत्र में कैसे हुआ बदलाव? जानिए इसके आर्किटेक्ट से

40 से ज्यादा मंदिरों को संरक्षित किया गया

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का क्षेत्रफल पहले 3,000 वर्ग फीट था। लगभग 400 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर के आसपास की 300 से ज्यादा बिल्डिंग को खरीदा गया। इसके बाद 5 लाख वर्ग फीट से ज्यादा जमीन में लगभग 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से निर्माण किया गया। हालांकि, निर्माण कार्य अभी जारी है। इसमें प्रमुख रूप से गंगा व्यू गैलरी, मणिकर्णिका, जलासेन और ललिता घाट से धाम आने के लिए प्रवेश द्वार और रास्ता बनाने का काम है। गौरतलब है कि धाम के लिए खरीदे गए भवनों को नष्ट करने के दौरान 40 से अधिक मंदिर मिले। उन्हें विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट के तहत नए सिरे से संरक्षित किया गया है।

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