अब आपकी AI चैट से तय होंगी Facebook और Instagram पर Ads, तो क्या नहीं रहेगी प्राइवेसी? – Nepal Updates | Stock Exchange

मेटा की नई नीति: एआई चैट से विज्ञापन, प्राइवेसी पर खतरा?

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एआई (AI) ने हमारी जिंदगी में कई बदलाव किए हैं। लोग अब हर दिन एआई चैटबॉट्स (AI Chatbots) और टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसी के साथ सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी (Privacy) को लेकर है। अब इसी चिंता को और बढ़ाने वाली एक नई खबर सामने आई है। मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिससे आपके सोशल मीडिया एक्सपीरियंस पर सीधा असर पड़ेगा। अब फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर दिखने वाले विज्ञापन इस बात पर आधारित होंगे कि आपने एआई (AI) से क्या बातें की हैं। यानी आपकी चैट्स ही आपके लिए टारगेटेड ऐड्स (Targeted Ads) तैयार करने में इस्तेमाल होंगी। यह डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव है, लेकिन क्या यह उपभोक्ता गोपनीयता (Consumer Privacy) के लिए खतरा है?

एआई चैट से इकट्ठा होगा डेटा

मेटा (Meta) ने हाल ही में घोषणा की है कि वह अपने एआई प्रोडक्ट्स (AI Products) से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर पर्सनलाइज्ड ऐड्स (Personalized Ads) दिखाने के लिए करेगा। अगर आपने एआई (AI) से किसी प्रोडक्ट या टॉपिक पर चर्चा की है, तो उससे जुड़े विज्ञापन आपके सामने आने लगेंगे। इसका सीधा असर विज्ञापन राजस्व (Advertising Revenue) पर पड़ेगा और व्यवसाय (Businesses) अपने विज्ञापन अभियान (Advertising Campaigns) को और अधिक लक्षित कर सकेंगे। यह डेटा सुरक्षा (Data Security) और ऑनलाइन सुरक्षा (Online Security) के मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कब से लागू होंगे ये बदलाव?

टेकक्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा (Meta) की यह नई पॉलिसी 16 दिसंबर से लागू हो जाएगी। कंपनी जल्द ही इस बारे में सभी यूजर्स को जानकारी देगी। शुरुआत में यह अपडेट दुनियाभर में रोलआउट होगा, लेकिन यूके, यूरोपीय संघ और दक्षिण कोरिया में इसे फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। वहां के स्थानीय नियमों की जांच पूरी होने के बाद ही इसे शुरू किया जाएगा। यह तकनीकी समाचार (Technology News) और सोशल मीडिया अपडेट (Social Media Updates) में सबसे चर्चित विषय है।

ईयू ने जताई प्राइवेसी पर चिंता

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूरोपीय संघ (EU) पहले ही मेटा (Meta) के एआई प्रोडक्ट्स (AI Products) को लेकर प्राइवेसी (Privacy) पर चिंता जता चुका है। यही वजह है कि वहां इसे लागू करने से पहले रेग्युलेटरी अप्रूवल का इंतजार किया जा रहा है।

क्यों है यह बड़ा मुद्दा

सोशल मीडिया कंपनियों (Social Media Companies) पर पहले भी डेटा ट्रैकिंग (Data Tracking) और प्राइवेसी उल्लंघन (Privacy Violation) को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब एआई चैट (AI Chat) से डेटा इकट्ठा करने का यह तरीका लोगों की निजी जानकारी (Personal Information) को और ज्यादा असुरक्षित बना सकता है। इंटरनेट सुरक्षा (Internet Security) और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या करना होगा यूजर्स को?

यूजर्स को अब यह ध्यान रखना होगा कि वे एआई (AI) से बातचीत करते समय क्या शेयर कर रहे हैं। क्योंकि वही जानकारी आगे चलकर उनके लिए विज्ञापन तय करने का आधार बनेगी। यानी अब एआई चैट्स (AI Chats) पर भी पहले से ज्यादा सावधानी बरतना जरूरी है। यह सोशल मीडिया मार्केटिंग (Social Media Marketing) में एक नया पहलू जोड़ता है, जहाँ उपभोक्ता जागरूकता (Consumer Awareness) और जानकारी गोपनीयता (Data Privacy) महत्वपूर्ण हो जाती है। ऑनलाइन गोपनीयता (Online Privacy) की सुरक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

मेटा (Meta) का यह कदम विज्ञापन जगत (Advertising World) के लिए बड़ा बदलाव है, लेकिन आम यूजर्स के लिए यह ऑनलाइन प्राइवेसी (Online Privacy) का नया खतरा भी साबित हो सकता है। डिजिटल युग (Digital Age) में हमें प्राइवेसी सेटिंग्स (Privacy Settings) को समझना और अपनी जानकारी को सुरक्षित रखना होगा।

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