कफ सिरप से बच्चों की मौत: मध्य प्रदेश में छाया मातम
सर्दी-खांसी के चलते खांसी की दवा पीना भी किसी की जान का दुश्मन बन जाएगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने से 3 और बच्चों की मौत हो गई है। बीते 20 दिनों के अंदर बच्चों के मरने की संख्या 11 हो चुकी है, जो गहन चिंता की बात है। बताया जा रहा है कि खांसी के लिए बच्चों की दी जाने वाली दवा खाने से बच्चों की किडनी फेल हो रही है, जिससे मौत हो रही है। राजस्थान में भी कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत हो रही है। यह स्वास्थ्य विभाग के लिए एक गंभीर चुनौती है। कफ सिरप त्रासदी ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
3 बच्चों की मौत, 5 की हालत गंभीर
दवा खाने से शुक्रवार को छिंदवाड़ा में 3 बच्चों की मौत हुई है। इससे पहले छिंदवाड़ा के कोयलांचल में छह बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने 2 दवाओं पर बैन लगा दिया था। अब भी छिंदवाड़ा में 5 बच्चों की तबीयत बिगड़ी हुई है। परासिया के SDM शुभम यादव ने मध्य प्रदेश में 9 बच्चों की मौत की पुष्टि की है। राजस्थान में भी 2 बच्चो की मौत हुई है। कफ सिरप के सेवन से बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे माता-पिता में डर का माहौल है। राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और उचित कदम उठाए।
क्यों कफ सिरप से जा रही है बच्चों की जान?
कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लायकॉल नामक दूषित तत्व मौजूद है, जिससे किडनी खराब होती है। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर पवन नांदुलकर ने कहा कि बच्चों की बायोप्स करवाई गई, जिसमें यह चौंकाने वाली बात सामने आई है। नागपुर लैब में सिरप की जांच की गई थी और दवा को कंटेमिनेटेड पाया गया। डायएथिलीन ग्लायकॉल एक जहरीला पदार्थ है, जो कफ सिरप में मिलने से बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
