भारत में श्रम कानूनों में एक बड़ा बदलाव हुआ है। सरकार ने 40 करोड़ से अधिक कर्मचारियों को राहत देते हुए 29 कानूनों को 4 लेबर कोड में बांटा है। नए नियमों के तहत, कर्मचारियों को एक साल की नौकरी में ग्रेच्युटी, ओवर टाइम पर दोगुनी सैलरी, महिलाओं को समान वेतन और हेल्थ चेकअप जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
हालांकि, इस नए लेबर कोड का देश के कई हिस्सों में विरोध हो रहा है। कुछ मजदूर संगठन इसे कर्मचारियों के खिलाफ और कंपनियों के पक्ष में बता रहे हैं।
क्यों हो रहा है विरोध?
मजदूर संगठनों का मानना है कि यह लेबर कोड मालिकों के हित में है और इससे कामगारों का शोषण बढ़ेगा। इंटक, एटक, सीआईटीयू जैसे संगठनों ने 26 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध का ऐलान किया है।
उनकी चिंता है कि नया लेबर कोड कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करता है और मालिकों को आसानी से कर्मचारियों को निकालने का अधिकार देता है। ‘फिक्स्ड टर्म नौकरी’ मॉडल नौकरी में अनिश्चितता को बढ़ावा देगा।
कांग्रेस का हमला
कांग्रेस ने भी इस कोड पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश के अनुसार, यह कोई क्रांतिकारी सुधार नहीं है, बल्कि मजदूरों की मूल मांगों से दूर है। क्या यह कोड मनरेगा में 400 रुपये की न्यूनतम मजदूरी, ‘राइट टू हेल्थ’, रोजगार गारंटी, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सोशल सिक्योरिटी या कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों पर रोक सुनिश्चित कर पाएगा?
उनका कहना है कि सरकार को कर्नाटक और राजस्थान के गिग वर्कर रिफॉर्म से सीखना चाहिए।
नौकरी की गारंटी समाप्त?
विरोधियों का कहना है कि इन कोड से कर्मचारियों की हड़ताल करने की क्षमता पर पाबंदी लगेगी, खासकर जब उन्हें नौकरी से निकाला जाए या उनकी पगार में कटौती हो।
इंटक के जनरल सेक्रेटरी संजय सिंह के अनुसार, नए कोड में लाभ तभी मिलेंगे जब कर्मचारी नौकरी में बना रहे। नौकरी की गारंटी समाप्त कर दी गई है, जिससे मजदूर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ठेकेदारों को मजदूरों का शोषण करने की छूट मिलने का डर है। साथ ही, रात की शिफ्ट में महिलाओं से काम कराए जाने जैसे नियमों के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं है। यह श्रमिकों के अधिकार के खिलाफ है। सरकार को श्रम सुधार पर पुनर्विचार करना चाहिए। रोजगार सृजन और कर्मचारी कल्याण के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है। श्रमिकों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। न्यूनतम मजदूरी और समान काम समान वेतन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। औद्योगिक संबंध को मजबूत करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए श्रम कानून को संतुलित बनाना चाहिए।
